Hindi Shayari


 अब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो

बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो

बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही

मेरी नजर बहार की फिर आशना न हो

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