मोजमस्ती मै डुबेछु म, थाहा थिएन कहाँ छु ईच्छा रहर मरीसके, अहिले जीउँदो लास भाछु खोटो रहेछ भाग्य मेरो, पाउनु दुःख पाएं…
Read moreउस्को आगमनले जिवन हर्षमा बिताउन सकूँ यि नयनमा उस्का नशालु आँखाहरू कैद गर्न सकूँ।। यदी मायाको पनि अङसंबन्ड र बागबन्डा …
Read more"जैसे फूलों को धागे में पिरो कर माला बनती है, वैसे ही शब्दों को अहसासों में पिरों कर कविता बनती है, ठीक वैसे ही स…
Read moreअब काश मेरे दर्द की कोई दवा न हो बढ़ता ही जाये ये तो मुसल्सल शिफ़ा न हो बाग़ों में देखूं टूटे हुए बर्ग ओ बार ही मेरी न…
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